सुशांत सिंह राजपूत और अर्णव गोस्वामी के बीच की कड़ी

 


जबसे सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु हुई है इस मामले में ने बहुत ज्यादा तूल पकड़ा है। इसमें मुंबई पुलिस, महाराष्ट्र सरकार की तो किरकिरी हुई ही है साथ मेंबॉलीवुड के कर्मों के बारे में भी लोग को पता चला है। जब यह मामला आगे बढ़ा था तब इस मामले को आगे बढ़ाने वाले कुछ ही पत्रकार और कुछ नामचीन हस्तियां सामने आई थी। सुब्रमण्यम स्वामी, अर्नब गोस्वामी, बिहार पुलिस, भारतीय जनता पार्टी, सुशांत सिंह राजपूत का परिवार और कुछ स्थानीय पत्रकारों ने इस मामले को आगे बढ़ाया। पर इन सब में सबसे आगे रहने वाले और पूरे देश में इस मामले को कोने-कोने तक पहुंचाने वालों में सबसे ऊपर नाम आता है अर्णब गोस्वामी का।अरनव गोस्वामी रिपब्लिक टीवी चैनल के प्रधान संपादक तो है ही। वह खुद इस बात का निश्चय करते हैं कि हर रात को 9:00 बजे किस मामले में चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु से से जुड़े हुए कई कार्यक्रम किए। क्योंकि इस मामले में महाराष्ट्र सरकार, मुंबई पुलिस, शिव सेना, कांग्रेस और एनसीपी की किरकिरी हो रही थी इस वजह से महाराष्ट्र सरकार ने अपने बल का अनैतिक प्रयोग करते हुए अरनव गोस्वामी को सबक सिखाने का मन बनाया। पहले अरनव गोस्वामी पर हमला करवाया गया जब वह अपने घर को ऑफिस से लौट रहे थे कई बाइक सवारों ने उनका पीछा किया। उन को डराने की कोशिश की गई। जब वह नहीं डरे तब एक बहुत पुराने मामले को दोबारा खोल कर कुछ धाराओं को लगाकर अर्नब गोस्वामी को उनके घर से सुबह 6:00 बजे पुलिस द्वारा उठा लिया गया। इस पूरे प्रकरण में अर्णव गोस्वामी के साथ बदतमीजी हुई धक्का-मुक्की हुई और उनको मारा पीटा गया। अर्नब गोस्वामी अभी भी जेल में है। उन्होंने पुलिस की गाड़ी से बैठकर पत्रकारों को बोला कि उनकी जान को खतरा है, उनको ठीक से खाना नहीं मिल रहा है और उनको जेल में प्रताड़ना दी जा रही है। सुशांत सिंह राजपूत को इंसाफ दिलाने के लिए जोड़ने वाले लोगों का यह फर्ज बनता है कि वह अर्णव गोस्वामी का भी साथ दें। आखिरकार अरनव गोस्वामी ने सच्चाई के लिए लड़ाई लड़ी है और ऐसे मुद्दों को हमेशा उठाया है जो हम से और आप से ताल्लुक रखते हैं। ऐसे मुद्दे जो हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं उनको टीवी की चर्चा में लाना और सरकारों पर, सरकारी कर्मचारियों पर, सरकारी दफ्तरों पर दबाव बनाना यह अर्णव गोस्वामी का काम है। हम सब को उसी तरह से मुहिम चलानी पड़ेगी जैसे हमने सुशांत सिंह राजपूत के लिए चलाई है। अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी और मुंबई पुलिस द्वारा उन पर किए गए अत्याचारों को लेकर हमको आवाज उठानी ही पड़ेगी। तो आइए इस मामले को उठाते हैं और सारे सोशल मीडिया पर इस मामले को वायरल बनाते हैं। इससे सरकारों पर, शिवसेना पर, कांग्रेस पर, एनसीपी पर, केंद्र सरकार पर और भारत की इंसानियत पर दबाव पड़ेगा। लोगों को झुकना ही होगा और अर्णब गोस्वामी को जेल से रिहा करना ही होगा।

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