सुशांत सिंह राजपूत और अर्णव गोस्वामी के बीच की कड़ी

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  जबसे सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु हुई है इस मामले में ने बहुत ज्यादा तूल पकड़ा है। इसमें मुंबई पुलिस, महाराष्ट्र सरकार की तो किरकिरी हुई ही है साथ मेंबॉलीवुड के कर्मों के बारे में भी लोग को पता चला है। जब यह मामला आगे बढ़ा था तब इस मामले को आगे बढ़ाने वाले कुछ ही पत्रकार और कुछ नामचीन हस्तियां सामने आई थी। सुब्रमण्यम स्वामी, अर्नब गोस्वामी, बिहार पुलिस, भारतीय जनता पार्टी, सुशांत सिंह राजपूत का परिवार और कुछ स्थानीय पत्रकारों ने इस मामले को आगे बढ़ाया। पर इन सब में सबसे आगे रहने वाले और पूरे देश में इस मामले को कोने-कोने तक पहुंचाने वालों में सबसे ऊपर नाम आता है अर्णब गोस्वामी का।अरनव गोस्वामी रिपब्लिक टीवी चैनल के प्रधान संपादक तो है ही। वह खुद इस बात का निश्चय करते हैं कि हर रात को 9:00 बजे किस मामले में चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु से से जुड़े हुए कई कार्यक्रम किए। क्योंकि इस मामले में महाराष्ट्र सरकार, मुंबई पुलिस, शिव सेना, कांग्रेस और एनसीपी की किरकिरी हो रही थी इस वजह से महाराष्ट्र सरकार ने अपने बल का अनैतिक प्रयोग करते हुए अरनव गोस्वामी को सबक...

फूल


फूल 

सुन्दरता और कोमलता की मूरत है ये फूल 
किसी आशिक की महबूबा की भोली सूरत है ये फूल


कभी साथियो संग मिलकर वरमाला बन जाता 
और छोटी से अदला-बदली से अटूट रिश्ता बनाता


फिर फूल यही टुकडो में बिखर कर सुहाग रात की सेज सजाता 
कुचल कुचल कर मर कर भी उस मधुर मिलन की गाथा गता 


कभी चरणो में उस ईश्वर के पड़ा मंद मंद मुस्काता 
और चरनामृत में घुल कर भगतो पर आशीष नवाता 


कभी किसी के अंतिम-दर्शन, मृतु शैया की शोभा बढाता
और शरीर के अंतिम सफ़र में श्रद्धा सुमन बन साथ निभाता 

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