सुशांत सिंह राजपूत और अर्णव गोस्वामी के बीच की कड़ी

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  जबसे सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु हुई है इस मामले में ने बहुत ज्यादा तूल पकड़ा है। इसमें मुंबई पुलिस, महाराष्ट्र सरकार की तो किरकिरी हुई ही है साथ मेंबॉलीवुड के कर्मों के बारे में भी लोग को पता चला है। जब यह मामला आगे बढ़ा था तब इस मामले को आगे बढ़ाने वाले कुछ ही पत्रकार और कुछ नामचीन हस्तियां सामने आई थी। सुब्रमण्यम स्वामी, अर्नब गोस्वामी, बिहार पुलिस, भारतीय जनता पार्टी, सुशांत सिंह राजपूत का परिवार और कुछ स्थानीय पत्रकारों ने इस मामले को आगे बढ़ाया। पर इन सब में सबसे आगे रहने वाले और पूरे देश में इस मामले को कोने-कोने तक पहुंचाने वालों में सबसे ऊपर नाम आता है अर्णब गोस्वामी का।अरनव गोस्वामी रिपब्लिक टीवी चैनल के प्रधान संपादक तो है ही। वह खुद इस बात का निश्चय करते हैं कि हर रात को 9:00 बजे किस मामले में चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु से से जुड़े हुए कई कार्यक्रम किए। क्योंकि इस मामले में महाराष्ट्र सरकार, मुंबई पुलिस, शिव सेना, कांग्रेस और एनसीपी की किरकिरी हो रही थी इस वजह से महाराष्ट्र सरकार ने अपने बल का अनैतिक प्रयोग करते हुए अरनव गोस्वामी को सबक...

बैंकॉक



नया घर, नयी सड़के और नए लोगो से इतफाक
संसार के इस सागर में बहता हुआ मै आ गया हूं बैंकॉक

अब थोडा ज़यादा पैसा है और दिमाग है इस्तेमाल में
पर दिल और सिकुड़ा है मुश्किल से सांसे लेता है इस माहौल में

वो लडकपन कॉलेज का, जो उफान मारता था हर महफ़िल से
अब बस बुलबुले ही फुद्काता है जवान महफ़िल में भी मुश्किल से

रोज़ की तरह कंप्यूटर पर बैठा, सहसा पड़ी खिड़की पर नज़र
नदी दिखी बहते हुए, दूर तक हरियाली और बारिशों का मंज़र

भौ सिकोड़ कर, यू अंदाज़ में दिमाग पर बहुत ज़ोर दिया
याद नहीं वो पिछला लम्हा जब मैंने प्रकृति का रसपान किया

सोच कर कुछ निकला मैं बाहर एक दिन यू ही इस नए संसार में
क्या देखता हू की प्यार दिखता नहीं बिकता है यहाँ बाज़ार में

बड़ी इमारते, बड़े वाहन, समर्धि के हुए बड़े दर्शन
पर भाग दौड़ की मतलबी दुनिया देख कर हुआ भारी मन

ये कवि मन मर रहा है इसकी किसी को ज़रुरत नहीं
फायदे नुक्सान की इस दुनिया में शायद किसी को किसी से मोहब्बत नहीं

पर ए मेरे मन विचलित न हो ये बदला नया ज़माना है
दोस्ती प्यार मोहब्बत अब नहीं मिलता, पैसा ही नया तराना है

ये शिकयते ,बाकी गुजारिशे समेट के रख, बीज बना ले
शायद कभी बारिश होगी और अंकुर फूटेगा, यही सोच कर मुस्कुराले


Comments

Namita said…
As usual, Awesome and very true and touching!! I am always a fan of your writing!

These days, world sells in money, sleeps money, talks money and eat money.. but no one cares about love and feelings!!

Keep up the Good Work!!
Saumya Mishra said…
Excellent in every sense..!! Deep thoughts...
It seems u r in search of true essence of life..
Life is turning out to b a race.. u cnt evn think of lowering dwn ur pace.. n d best ppl r those who believe in brisk walk.. coz life is jst nt abt winning d race.. it is to earn lot many things which does not include only money... :)
Saumya Mishra said…
Excellent in every sense..
It seems that u r in search of true essence of life... ppl hv 4gt tat..life is nt all earning money..bt to earn lot mny things whch r far much important...
dinesh said…
really dear very interesting post as well as blog. Very deep thinking !

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