हिंदी
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सदियों से हिंदी जनसंपर्क की भाषा के रूप में माननीय है,
इसीलिए यह राष्ट्रभाषा की सच्ची अधिकारणी है
किंतु आज के इस विज्ञान युग में हिंदी की स्थिति विचारणीय है।
चाचा नेहरू सुभाष बोस ने हिंदी का गुणगान गाया था तथा इसे स्वर्णिम बनाया था।
पर वर्तमान में क्या हिंदी का प्रकाश मध्यम नहीं हो गया है,
क्या हिंदी का अस्तित्व स्वर्णिम रह गया है।
"हिंदी से कभी कैरियर बना करते हैं"
यह कहकर जेंटलमैन हिंदी का बहिष्कार किया करते हैं।
हिंदी दिवस की वर्तमान में क्या परिभाषा है,
हिंदी पर कुछ निबंध और भाषण इस विषय पर की 'हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है'।
लोगों ने हिंदी को क्या से क्या बना डाला है,
अब तो बस अंग्रेजी का ही बोलबाला है।
बिना अंग्रेजी के ज्ञान के,
नौकरी असंभव है वर्तमान में।
हिंदी को यदि सच्ची राष्ट्रभाषा बनाना है तो इसे सच्चे हृदय से अपनाना होगा,
हिंदी को जीवन का साझीदार बनाना होगा।
तब हिंदी की कांति लौट आएगी,
और इस बहाने देश की एकता भी बढ़ जाएगी।
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